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Mahisasura Maridini Stotram - Complete version - PART I

AUTHOR: Adi Shankaracharya. Part2 - http://in.youtube.com/watch?v=n7WSYOt0J6M ---------------------------------------- महिषासुरमर्दिनिस्तोत्रम् Navratri Song...

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Master Facilitator
Comment by guriya bhullar on October 25, 2012 at 6:32pm
अयि गिरिनंदिनि नंदितमेदिनि विश्वविनोदिनि नंदनुते 
गिरिवर विंध्य शिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । 
भगवति हे शितिकण्ठकुटुंबिनि भूरि कुटुंबिनि भूरि कृते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१॥

 सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते 
त्रिभुवनपोषिणि शंकरतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ।
दनुज निरोषिणि दितिसुत रोषिणि दुर्मद शोषिणि सिन्धुसुते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२॥

                                                                       

अयि जगदंब मदंब कदंब वनप्रिय वासिनि हासरते 
शिखरि शिरोमणि तुङ्ग हिमालय शृंग निजालय मध्यगते । 
मधु मधुरे मधु कैटभ गंजिनि कैटभ भंजिनि रासरते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥३॥

 अयि शतखण्ड विखण्डित रुण्ड वितुण्डित शुण्ड गजाधिपते 
रिपु गज गण्ड विदारण चण्ड पराक्रम शुण्ड मृगाधिपते ।
निज भुज दण्ड निपातित खण्ड विपातित मुण्ड भटाधिपते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥४॥

                                                                     अयि रण दुर्मद शत्रु वधोदित दुर्धर निर्जर शक्तिभृते
चतुर विचार धुरीण महाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते । 
दुरित दुरीह दुराशय दुर्मति दानवदूत कृतांतमते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥५॥

                                                                     अयि शरणागत वैरि वधूवर वीर वराभय दायकरे 
त्रिभुवन मस्तक शूल विरोधि शिरोधि कृतामल शूलकरे । 
दुमिदुमि तामर दुंदुभिनाद महो मुखरीकृत तिग्मकरे 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥६अयि निज हुँकृति मात्र निराकृत धूम्र विलोचन धूम्र शते 
समर विशोषित शोणित बीज समुद्भव शोणित बीज लते । 
शिव शिव शुंभ निशुंभ महाहव तर्पित भूत पिशाचरते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥७॥

                                                                 

धनुरनु संग रणक्षणसंग परिस्फुर दंग नटत्कटके 
कनक पिशंग पृषत्क निषंग रसद्भट शृंग हतावटुके ।
कृत चतुरङ्ग बलक्षिति रङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥८॥

 

                                       जय जय जप्य जयेजय शब्द परस्तुति तत्पर विश्वनुते 
झण झण झिञ्जिमि झिंकृत नूपुर सिंजित मोहित भूतपते । 
नटित नटार्ध नटीनट नायक नाटित नाट्य सुगानरते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥९॥

                                                                                             

अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर कांतियुते 
श्रित रजनी रजनी रजनी रजनी रजनीकर वक्त्रवृते । 
सुनयन विभ्रमर भ्रमर भ्रमर भ्रमर भ्रमराधिपते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१०
Comment by Dr.Rekha N Deshmukh on October 25, 2012 at 11:16am

Can anybody provide me with words of the song write .  ,I woud  like to sing such

a pure empowering Melodious song.

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